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आँखों का पानी?

आज महिला दिवस है,
मुबारक कहते हैं 
बराबरी की बात पर,
सब नदारद कहते है !



364 दिन लाचार करते हैं,
और फिर एक दिन मुबारकबाद ,
सच्चाई समेटने को
कर दिए कितने दिन बर्बाद

कहने को तो और भी महिला दिवस है,
ताज़ा खबर है और गरम बहस है!

 
आज महिला दिवस है,
कहते हो तो मान लेते हैं ,
पर वो हालात कहाँ,
कि देखे और जान लेते हैं !

आज महिला दिवस है,
शहर में नयी सर्कस है,
सट्टा लगा है, सूना है
बड़ी ताकतवर बला है !

आज महिला दिवस है, 
सुनते हैं संसद में बहस है,
अँधेरे कोने में तड़पती,
न जाने कितनी बेबस हैं !! 

आज महिला दिवस है,
क्या कोई बहस है,
लार टपकती नहीं शायद,
पर वही हवस है !

एक और गुजर गया, सामने
क्या बहस का असर गया,
खबर बनती रही चौबिसों-सात
आँखों से पानी उतर गया!

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