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मारें या बचाएं?

सुना है, मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है,
फिर क्यों किसी को जलाने सारा जमाना खड़ा होता है?
बुराई पर अच्छाई की जीत?
या अपने धर्म, जाति की प्रीत?
कभी रावण, कभी पहलू,
कभी रोहित, कभी महिषासुर
कभी डेल्टा, कभी सुपर्णखा,
कभी चुड़ैल, कभी कलमुँही!




जिसकी ताकत, उसका सही,
दौर कोई हो कहानी वही?
शोर, धमाका, आतिश, धुआँ,
धुंधला सच, अंधा कुआँ,
पहले राम, अब श्री, देव, आसा, रहीम
सदगुरु, हो जा शुरू
नीम हक़ीम, सब नामचीन!
सब मुश्किलों का हल,
हर मर्ज के दवा,
पालतू ...., खरीदे गवाह,

आप क्या यकीन करते हैं?
क्या आपके प्रश्न भी चढ़ावा हैं,
आपकी भी कोई साध्वी, कोई बाबा हैं?
आपके विकल्प, आपके प्रश्न,
क्या लंका दहन हैं?
आपकी सोच आपके माथे के साथ टिकी है?
किसी मंदिर की ड्यौढ़ी पर लाइन में खड़ी है?
सवाल खत्म सिर्फ शिकायत है?
क्या आपकी मेहनत को मन्नत की आदत है?
101, 1001, सोने का मुकूट, या पानी चढ़ा,
आपकी औकात से थोड़ा बड़ा?
क्योंकि भक्ति सबूत मांगती है?

सोई है अंतरात्मा, देखें कब जागती है?







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2026 वही पुराना नया साल!

नया साल आया है, लेकर वहीं पुराना सवाल आया है? मणिपुर, गाजा, सूडान, का ख़्याल आया है, देहरादून में त्रिपुरा की हत्या का बवाल आया है, सेंगर के बलात्कार का नया हाल आया है? वोट चोरी का क्या कोई निकाल आया है? उमर की बेल को कोई मिसाल आया है? जज साहेब बिके हुए हैं, सत्ता नरभक्षी है, कलेक्टर सारे डरे हुए हैं, विपक्षी अपनी गद्दियों में धंसे हुए है, पत्रकार सब दरबारी बने हुए हैं, सरकार के इश्तहार बने हुए हैं! आप और हम बॉटल में सड़ता अचार हुए हैं! हिंदुत्व का चरम है, और इसका कैसा मर्म है? मुसलमान इंसान नहीं? दलित का कोई संज्ञान नहीं? औरत इज्ज़त है, लूटने वाला सामान! नहीं? झूठ का बोलबाला हो, सच जैसे भुलावा हो, तारीख़ बदली जाएगी, भगवा इबारत आएगी, बाकी रंग शहीद होंगे, राम के सारे ईद होंगे! फिर भी साल मुबारक हो, देखिए वह जो पसंद हैं, धागा किसी का हो, आपकी पतंग है! अच्छा है इतनी उमंग है, सबका अपना ढंग है, अपनी अपनी पसंद है, हम (मैं भी) क्या करें, जो करोड़ की मुट्ठी तंग है, कपड़े उनके पैबंद हैं, सारे फीके रंग हैं! मुबारक 2026 मुबारक

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