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नवीन



एक आह है जिसे गुमराह करते हैं,

यूँ टूटकर जो आप दिलों को तरते हैं!!


बेइंतहा ईश्क है आपके सीने में,

काहे कमबख़्त कायदा करते हैं!!




तमाम खूबियां हैं यारब तुझमें,

क्यों बस खामियों का जायज़ा करते हैं?


एक ख़लिश का ये लंबा सफर है,

कुछ तजुर्बे ताउम्र असर करते हैं!.


कितने आसान हैं साथ जब हों,

जो सामने वही आईने दिखते हैं!



कितने शिकन चल गुज़रे पेशानी से,

खामखाँ ही इतनी फिक्र करते हैं!


देर आये, दुरुस्त आये, चुस्त आये,

यूँ भी अपने यकीन असर करते हैं!


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