'गजब' हो गया, इतनी सी बात से बस कि तुमने खुद को मालूम होने दिया कि तुमने खोज लिया है, और इस बार साफ़ हवा में चलता, तुम्हारे दूर कहीं अंदर से जगा एक फ़ैसला, अब उसे छोड़, एक कदम भी, आगे नहीं जाने वाला, गजब, अब अजब नहीं, वो झुक के पानी पीना, रस्ते किनारे और दुआ करना, और दो बूंद आंसू गिरना वो यादें जो संभाली हैं और ये एहसास, कि ये खामोशी इस लिये नहीं कि आँख कान को दूर रखें उस मकाम से जो तुम्हें बचाएगा, तुम्हें हांसिल है, अब वो ताकत, जाने-देने उस धूल से लदे प्यासे फ़कीरी सच को जो तुम्हें यहाँ तक लाया है, चलते हुए टेढी कमर, झुके सर और तुम्हें सजग करते खुलासे से (डेविड वाईट के 'द मिरेकल हेड कम' को पकड़ने की एक कोशिश)
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।