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प्यार कोरोना - Love in the time of Corona

प्यार में एक दूजे के मजबुर कर दिया हम ने खुद ही खुद को दूर (3 फीट) कर दिया साँसों से सांस मिली तो बात बढ़ जाएगी, इसलिए मास्क पहनने पर मजबूर कर दिया! पहले चिढ़ कहते, क्यों हाथ धो पीछे पड़े हो, अब हाथ धोते देख कर गज़ब मुस्कराते हैं!! यूँ तो साथ जीने मरने की कसम खाई है, दूर हो गए जबसे उनको खांसी आई है! धड़कने बढ़ जाती हैं बस देख के उनको, पर आजकल ये देख कर वो सहम जाते हैं! जो भी नज़दीकी थी अब दिल में रह गई, कहते हैं अब तो हम और पास आ गए?   ज़ुल्फ़ों तले गुजरेगी शाम ये वादा था पक्का, छंटवाते थे जो जुल्फें आज कटवा कर आ गए!! पहले अदा से इतरा के हाथ में ख़त थमाते थे, अब वो देख कर दूर से ही ताली बजाते हैं! तन्हाई में तस्वीर से मेरी बोलते होंगे, सोचा, ख़बर आई है कि मेरी कोविड रिपोर्ट ढूंढते हैं!!

मोहब्बत!

मोहब्बत क्यों ये मुश्किल काम है? पहलू में उनके सुकूँ, आराम है! क्यों दुनिया में आशिकी बदनाम है? उनकी शिकायत, ये जरूरी काम है! फिक्र है मेरी ये उनका काम है, ये समझ लेना सफर का नाम है! सब शिकायत है मेरी ख़ामोशी से चुप हैं हम और खासे बदनाम हैं! नज़र जब भी नज़रिया बन जाए, समझ लीजे किसी का काम तमाम है! ज़िंदगी जी रही है ख़ूब दोनों को, हम हैं साकी और वो जाम है! मोहब्बत गहरी पहचान है, सुबह मेरी ओ उनकी शाम है!

रहने दो!

मुश्किलों को तुम मेरी आसान रहने दो, अभी खुद को तुम मेरी जान रहने दो! ज़िन्दगी सफर है बस यही काम रहने दो, मंजिलों को अभी ज़रा अंजान रहने दो! भूल जाएं सब शिकायतें ओ शिकवे सफर में ज़रा कम सामन रहने दो! तुम ही हो मेरी दुनिया में और क्या, ये दुनिया बस मेरे नाम रहने दो! आईना भी और परछाई भी हैं दोनों, लाज़िम है यही, यही पहचान रहने दो! साथ हैं बस उसी में सारी बात है, ज़ाहिर हैं, वही मेरे अरमान रहने दो!

ज़िंदगी आसान - निशा आदित्य टाईप!

साथ आपका, सफ़र साथ का, ज़िंदगी इतनी आसान चाहिये! बहुत किया इंतज़ार ज़िंदगी, साथ साथ ही काम चाहिये! आपस में ही पटना-निपटना है! बस और क्या अब काम चाहिये? बचपन पास है, ज़वानी साथ है,  बस उतना ही सामान चाहिये! ढूँढ ली जगह दिल में रहने कि, हमको कहाँ कोई मकान चाहिये जिसको देखो ' हमें मालूम था' फ़िर भी सबको एलान चाहिये! इश्क़ लम्हा, हमसफ़री रास्ता है,  ऐसेइ थोड़े हमको प्लान चाहिये? जो है सो है, सीधी सी बात है,  इसमें क्यों कोई विज्ञान चाहिए? अपने हिस्से की दुनिया हम बदल लेंगे, अभी शुरू है बस थोड़ा टाइम चाहिए!

मोहब्बत फ़रीद!

सफ़र में तुमसे मुलाक़ात हो जाए, हमसफरी के ज़रा हालात हो जाएं! हम तो मुसाफ़िर हैं ज़िन्दगी के, बस उनके भी यही हालात हो जाएं!! मोहब्बत है झोली में और आरजू करते हैं, मेरी किसी ख़ासियत को वो मुरीद हो जाएं! यूँ तो हम अपने ही पैरों पर खड़े हैं, हसरत, की वो कंधो के करीब हो जाएं! यूँ हम अकेले ही अपनी नाक में दम करते हैं, जी करता है मेरी मुश्किलों की ख़रीद हो जाये! इस रस्ते आइये तो हम भी एक मक़ाम हैं, दुआ है, ये सफ़र आपको फ़रीद हो जाए! (farid -unique) इंतज़ार है पर हम कभी करते नहीं, कौन जाने कब, यकीं इतफ़ाक हो जाए! बेबाक़ी को मेरी बेसबरी मत समझिये, क्या हरकत जो होना है सो हो जाये!

अमृता प्रीतम

अपनी ही खामोश समझ को नकार है मर्द को अगर औरत की ताकत से इंकार है! कोई लफ़्ज़ ज़ब ज़ुबां तलक आते हैं, खत्म हो जाते हैं! अगर बचा लिया किसी ने, तो एक कागज़ उतरते है,  और वहीं ढेर हो जाते हैं! रूह पर कुर्बान होने पेश,  लबों से लरज़ते हमारे नाम, एक मुक्कदस आवाज़ बनते हैं! (मुक्कदस - Sacred) ज़रा दूरतलक देखिये, सच्चाई और झूठ के बीच 'जगह' है!  ज़रा खाली! दर्द था, खामोशी से मेंने एक कश सिगरेट के माफ़ि खींच लिया, चंद शेर बचे थे, कुछ कलाम, जो छिटक दिये मेंने राख करके! एक बार एक हीर के अश्क, और 'हीर-रांझा' तुम्हारे, आज हज़ार आँखे रोती है,  बुलाती हूँ तुम्हें, वारिस शाह! (https://en.wikipedia.org/wiki/Ajj_aakhaan_Waris_Shah_nu) कोशिश है कि सुरज किरण बन तुम्हारे रंगों से लिपट जाउं, और जो तस्वीर तुम करते हो, उस में सिमट जाउं! खाक होने के बाद, ज़रा ज़र्रों को समेट एक रेशा बुन कर, बन कर, फ़िर उस छोर तुम्हें मिलुंगी! फ़िर तुम्हारी याद, आई फ़िर आग मेरे ओंठ आई, इश्क़ ज़हर का प्याला सही, मुझे फ़िर भर प्याला ही! बहुत अफ़साने हैं, जो कागज़ नहीं उतरे, वो दर...

हम तुम

गुम हैं, कभी खुद में, कभी तुम में, कभी हम में, हम हैं, कभी साथ, कभी अकेले, कभी साथ अकेले, तुम हो, कभी साथ, कभी अकेले, कभी तुम, प्यार है,         इश्क भी,           और मोहब्बत इक़रार भी,    कभी अश्क़,        कभी बंदगी तक़रार भी,    कभी रश्क़।        कभी बगावत सरसवार भी,  कभी फ़रहत       दिलअज़ीज़ आदत                            (bliss) गम हैं, ख़ुशी भी, शिकायत भी, शरारत भी ज़ख्म हैं, दवा है, दर्द भी, और दुआ भी नज़दीकी, कभी रूमानी, कभी रूहानी, कभी बेमानी हामी, कभी इनकार, कभी तक़रार, कभी इसरार मानी, कभी मनमानी, कभी बेमानी, कभी नानी😊 दूरी, कभी खुद से, कभी तुमसे, कभी अनबन से रास्ते कभी अपने कभी सपने कभी चखने मोड़, कभी बहकाते कभी बहलाते कभी संभलाते दोनों की अलग फ़ितरत, हर आदत, साथ क़यामत दोनों की एक सोच, साथ की दुनिया हालात की तमाम ताल्लुक़ात की ...

इतफ़ाकी मोहब्बत अपवादी इश्क़!

हाथ पकड़ लेंगे मंझधारे, साहिल कब से सोच खड़े हैं, बरसों से रस्ता तकते धारे हैं, सोच किनारे किस बात अड़े हैं! पहली नज़र का प्यार क्या है? एक उम्र इंतज़ार क्या है? हमेशा रहेगा एतबार क्या है? सर पर भूत सवार क्या है? इश्क एक एहसास है, एक लम्हा कोइ खास है क्यों उम्र भर उम्मीद ओ' सात जन्म कि बात है? मोहब्ब्त में हर घड़ी जन्नत है, फ़िर क्यों सात जन्म की मन्नत है? इश्क जिस्म है तो तमाम हैं, रुह है तो एक है, इतेहाद है, ज़ज़्बात है तो पल की बात, सोच, एक ख़याली पुलाव है! दो दिल मिल जाऐं तो इश्क है, ख़्यालात एक हों तो इश्क़ है, मुख़ालिफ़त दिलकशी की बात, क्यों किसी को किसी से रश्क है? इश्क़ घरफुँक तमाशा है, जन्नत नसीबी का रास्ता है, कोई एकदम अकेला इसमें, किसी का दुनिया से वास्ता है! जिस इश्क़ में सब जायज़ है, वो सोच कितनी नाज़ायज़ है?

कैसे कहें कि इश्क़ है!

शौक इश्क है, कद्र इश्क है, समझ सके किसी का, वो दर्द इश्क़ है! इश्क़ नज़र है, मिलना, झुकना, फेर लेना, तरेर लेना, चुराना, नचाना कभी बचना, कभी बचाना इश्क इलाज़ है, मर्ज़ नहीं, रवैया है दिल का, फ़र्ज़ नहीं,  बचपन है, बचपना नहीं, सोच में पड़ गये, फ़िर इश्क़ क्या? इश्क़ सफ़र है, रुकने का नाम नहीं, क्यों आप किसी जिद्द पर अड़े हैं? 'हम ऐसे ही' तारीख़ हो गयी बात है, हाथ में हाथ है अब बदले हालात हैं! इश्क़ एकतरफ़ा ही होता है, इसमें इतफ़ाक तमाम होता है! जरुरत होती है किसी को, कहीं फ़क़त ज़ज़्बात होता है! इश्क़ ज़ज्बात है, हरदम किसी का साथ नहीं, अपने से भी कीजे थोडा, यूँ बुरे हालात नहीं!! इश्क़ नज़र है, हरदम नज़र मिलने की बात नहीं, अपने गरेबाँ झांकिए ये आइनों की बात नहीं!! वो लम्हा जब आसमाँ के नज़दीक खड़े, बादलों से बतियाना इश्क़ नहीं तो क्या? और अचानक नज़र आये फूल को उठा, सूंघ कर मुस्कराना इश्क़ नहीं तो क्या! रास्तों में एक मोड़ है इश्क, मुसाफिरी आशिक़ी का नाम है! क्या फर्क पड़ता है हमसफ़र, कौन, और कितनी दूर कोई मक़ाम है?

नज़र नजरिया नज़रअंदाज़!!

अंदाज़ इ नज़र से क्या अंदाज़ लगाएं, दिल की सुनें या अपना दिमाग लगाएं! मोहब्बत हरदम एकतरफ़ा ही होती है एक दूसरे से हो ये महज़ इत्तफ़ाक़ है! क्यों अफ़सोस है की आप नज़रअंदाज़ हैं, मोहब्बत ज़ेब में रख घूमने की चीज़ नहीं! इश्क़ है तो इंकार नज़रअंदाज़ क्यों, प्यार एहसास है दिल धड़काता है, सामान नहीं जो ख़रीदा जाता है??? अंदाज़ लगाएं उनकी नज़र से या नज़रअंदाज़ करें, समझ नहीं आता कहाँ से अफ़साना ए आगाज़ करें! बहुत सी अदाएं उनकी ओ एक अंदाज़ ए नज़र, तमाम तूफ़ान पाल रहे हैं और उस पर ये कहर! सच है कि उसने हमें नज़र अंदाज़ किया हमने भी इस सच को नज़रअंदाज़ किया! यूँ अब उनकी नज़रों के अंदाज़ हो गए, नज़र आये नहीं की नज़र-अंदाज़ हो गए? जब से उनका अंदाज़-ए-नज़र देखा, अपने आप को नज़र अंदाज़ कर दिया! अंदाज ए नज़र को नज़रअंदाज़ कीजे, दिल की बात है दिल से समझ लीजे! अंदाज़ नज़र का नज़र अंदाज़ कर दिया, हमने आगाज़ किया उसने अंजाम दे दिया!

वक्त साकी वक्त पैमाना!

इश्क सलामत है कयामत को असर करने को , युँ तो उमर गुजरने को फ़क्त समय काफ़ी है! इश्क़ इबादत है क़यामत को असर होने को, युँ तो रोज़ का दुआ-सलाम काफ़ी है! वक्त साकी है हंसी ये शाम होने दो, लम्हों को छलकता जाम होने दो ! पैमाने में मत ड़ालो हर एक पल को, साथ को मेरे यूँ ही अंजाम होने दो! सफ़र ही बेहतर अपने, चाहे कुछ नाम रहने दो, मुसाफ़िर हमसफ़र हैं, रास्तों को काम रहने दो!   अकेलापन् गम हुआ तो क्या अकेलापन कम होगा? चंद लम्हे आँखॊं का मौसम जरा नम होगा, बदल जायेंगे रास्ते किसी मोड़ पर आकर पलक् झपकते बदला हुआ मौसम होगा! वक्त बीतेगा तो उनका भी गम कम होगा, मुस्कराएंगे तो वही मौसम होगा, 'सेल्फ़ी' ली कभी ज़ुल्फ़ लहरा के तस्वीर में एक खालीपन होगा! दूर है पर इतने भी मज़बुर नहीं‌ हैं, मालिक हैं वो मेरे, हुज़ूर नहीं हैं! नज़दीकियों के इतने मजबूर नहीं हैं, अपने ही हाथों से हम दूर नहीं है! युँ तो हम युँ भी मुस्कराते हैं, और बात है जब करीब आते हैं! हर साँस दिल को एक खबर देती है, हर खबर खुद को ढुंढते नज़र आते हैं!

हम सफ़र!

हो गयी मोहब्बत है तो गले मिल लीजे, बात आगे बड़ गयी तो मुश्किल होगी! इकरार है तो सफ़र साथ कर लीजे, यूँ नहीं कि सपनों में सबर कीजे! नासमझी का एक और नाम मोहब्बत है, वरना इंसा-इंसा में फ़रक कोई करता है? है चार दिन जिंदगी ये तय किये बैठा हूँ,  कहाँ जाऊं कि तुझे दिल किये बैठा हूँ!! हम सफ़र हैं तो कभी मोड़ आयेंगे, हमसफ़र हैं क्या कभी छोड़ पायेंगे! मोहब्बत है तो शिकायत की गुंजाईश नहीं, पसंद न आये ये ऐसी कोई नुमाईश नहीं! मुहब्बत में कोई भी परेशानी जायज़ नहीं, दीवानगी में ऐसी कोई भी रवायत नहीं! कुछ ऐसी हकीकत है, जैसे सपनों‌ की शरारत है, मुस्कराते हैं ऐसे जैसे हम कोई हसीन आदत हैं चलिये हम मोहब्बत को एक नाम देते हैं दुआ दीजिये, आपको ये काम देते हैं! यूँ अपने ज़ज़बातों को अंज़ाम देते हैं,  आप हाँ करिये मोहब्बत नाम देते हैं!

इश्क़ बगावत!

प्यार करना मेरी आदत है मतलब ये नहीं कि सबको दावत है! कोई गुनाह नहीं कि सबूत हो, ऐसी उम्मीदों को लानत है! ये जरूर नही कि दोनो को हो,  बेवज़ह न कोई क़यामत हो! नज़रों से कुछ बयाँ न करें,  इस ज़ुबाँ में मेरी ज़हालत है! जो मेरे जहन को जहमत दे उस शय को ये शहादत है! जो मेरी रुह को लानत दे ये बात उसी के बावत है किसी मंजूरी का नहीं मोहताज़ मेरा इश्क भी इक बगावत है!! दिल तोड़ के इतना खुश न बनो कुछ टुकड़े अब भी सलामत हैं !

आसान काम!

जो मालुम है उस पर यकीन रहने दो! अपने सपनों को तुम हसीन रहने दो!! मुश्किलों को अपनी आसान रहने दो! जब तक मैं हुँ , मेरी जान रहने दो!! कब समझे है आईने अंजान रहने दो! अपनी आँखों में ही अपनी शान रहने दो!! मुझको मुझसे ही समझो , बात आसान रहने दो! मेरी गलतियों को तुम मेहमान रहने दो!! छू कर महसूस करो लगे जो दाम रहने दो! जिंदगी को अपनी छलकता जाम रहने दो !! चोट और भी हों , रस्ते का काम रहने दो ! मुझे अपने छालों का बाम रहने दो !!