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विजय है, वज़ह है!

मुसाफ़िर भी हैं, अपना ही सामान भी,
रास्ता भी हैं आप, रास्तों की जान भी!!


कितने बुलंद हैं आपके साथ फलकर,
दुआ क़बूल हैं आपके साथ चलकर!





सदा भी है, अदा भी है, नज़ाकत भी,
काम की चीज़ है आपकी बग़ावत भी!


कितने हुनर हैं जो आप के क़ाबिल हैं,
हौंसला हैं आप हमारा और हासिल भी!




ख़ुद से हैं आपको अपनी शिकायतें, 
उस्तादी की ये बेहतर रवायतें हैं!!


इरादे कम नहीं, इरादों के गम जरूर 
कितना कुछ करने को चलना है दूर!




खामियाँ सब अकेली पड़ जाती हैं,
आपकी खूबियां उनको शरमाती नहीं!!



जात-पात, बुरी बात, कदम कदम पर घात,
आपसे क्या बोले कोई मुश्किलों की बात?




तहज़ीब और रवायतें कुलजमा साज़िश हैं,
आपके जज़्बे से कदम कदम वो खारिज़ हैं!


अब भी कहाँ आपकी मुश्किलें आसान हैं,
कायम रहे आपके चेहरे जो मुस्कान है! 

#आमीन

(विजय कई सालों से हमारे साथी हैं, उनके साथ काम कर के, उनके दो दशक से ज्यादा के काम की बातें सुनकर, और उनके सीखने और सिखाने के जज़्बे को सलाम है)‌
जय भीम विजय भाई!


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