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हम सरकार!


टिकटोक पर बैन है!
व्हाट्सएप से चैन है? पेटीएम फ़िर कैसा है?
पीएम केयर में पैसा है?

हाथ धोए पीछे पड़े
खासे चिकने घड़े,
खोखले भाषण सब,
क्या कीजिएगा अब?



मुफ़्त में राशन देंगे,
                                                                                          योगा के आसन देंगे,
झुठ आश्वासन देंगे,
सवाल न होने देंगे!

देश की सरकार है
बात ये बेकार है,
इंतज़ार करते मदद का,
लाखों लाचार हैं!



बात बढ-चढ कर बोलना, बीमारी मज़हब से तोलना नफ़रत को भक्ति बोलना
सत्ता के खेल हैं!
सरपरस्त लकीर के फ़क़ीर हैं,
कहाँ किसी के ज़मीर हैं, खून चूस मज़लूम का कामयाब सब अमीर हैं!



ये कैसे हालात हैं,
                                                                                            घर ही हवालात हैं,
कैसे सवालात हैं?
सूली चढ़ा रहे, वो

सरहदों के गुलाम हैं हम,
                                                                                           सीमाओं के कम हैं,
अपनी आदतों के एडिक्ट!
संस्कृति के सिमटे हैं

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